OSI Model In Hindi?/ OSI Model क्या है?/ OSI Model Layers के क्या क्या functions है ?/OSI Model Layers Functions in Hindi?

हेलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट में मैं आपको OSI Model(osi model layers functions in hindi ) के बारे में बताने वाला हूँ |इसका फुल फॉर्म होता है open system interconnection| इस ब्लॉग में हम OSI मॉडल की प्रत्येक Layer के function को डिटेल में discuss करेंगे| इस ब्लॉग में हम देखेंगे की OSI Model का यूज़ करके communication कैसे establish किया जाता है |

इस ब्लॉग(osi model layers functions in hindi) में हम OSI model और उसकी layers functioning से रिलेटेड बहुत अच्छे और useful questions को discuss करेंगे जैसे कि What is the function of each layer of the OSI model?…

…What is a function of layer 2 of the OSI model? What is the function of data link layer in OSI model? What is the main function of transport layer in OSI model? What is OSI layer with example?…

..What is ISO layer? Why is OSI model important? What is OSI model explain? Why do we use layering? What are the 5 layers of TCP IP? What is the layer? Which layers are user support layers? What is OSI model and how it works?..

..How do OSI layers interact with each other? What are the layers of TCP IP? How do I remember the OSI model? Which layer of the OSI model is the most important?

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OSI Model Layers Functions in Hindi

What is the function of each layer of the OSI model?/ What is the function of layer 2 of the OSI model?/ What is the function of the data link layer in the OSI model?/ What is the main function of the transport layer in OSI model?/ OSI Model Layers Functions in Hindi

OSI Model Layers Functions in Hindi:

(Physical Layer)फिजिकल लेयर:

फिजिकल लेयर के अंतरगत हम कोई भी डाटा और bitstream को फिजिकल मध्यम के जरिये transmit करते है | यहाँ पर jyadatar mechenical और इलेक्ट्रिकल equipments का यूज़ होता है जिससे कि हम Data Transmission के लिए जरुरी interface और Transmission मध्यम तैयार करते है |

physical Layer में हम वे सारे procedure और functions define करते है जो कि physical device और interface को Transmission करने के लिए मदद करते है | आईये अब physical लेयर से रिलेटेड कुछ important terminology को देखते है |

Responsibility of bits :

physical Layer में डाटा बिट स्ट्रीम के फॉर्म में होता है (0 एंड 1) और इनके Transmission के लिए यह bit एक सिंगल इलेक्ट्रिकल और ऑप्टिकल फॉर्म में होना चाहिए | आईये अब हम physical Layer द्वारा डिफाइन किये गए कुछ encoding के types देखते है |

synchronization of bit :

यहाँ पर Data सेंड करने वाले और डाटा रिसीव करने वाले की clock synchronize होना चाहिए| यहाँ पर Sender और Receiver के बीच bit level synchronization perform होता है |

Transmission mode :

यहाँ पर physical Layer द्वारा दो डिवाइस के बीच में होने वाले डाटा ट्रांसमिशन का डायरेक्शन decide किया जाता है | physical Layer decide करती है कि डाटा को किस ट्रांसमिशन मोड में सेंड करना है | यह ट्रांसमिशन मोड होते है Simplex , Half duplex , and full duplex .

सिम्पलेक्स मोड के अंतर्गत एक डिवाइस केवल डाटा सेंड कर सकती है और दूसरी डिवाइस केवल डाटा रिसीव कर सकती है | सिम्पलेक्स मोड में केवल one way कम्युनिकेशन होता है |

Half -duplex मोड में सेन्डर और रिसीवर दोनों डिवाइस डाटा को सेंड और रिसीव कर सकती है पर अलग अलग समय में |

जबकि फुल डुप्लेक्स मोड में सेन्डर और रिसीवर डिवाइस दोनों डाटा को एक ही समय में सेंड और रिसीव कर सकती है |

The physical characteristic of interface एंड media :

दो डिवाइस के बीच यूज़ होने वाला इंटरफ़ेस और ट्रांसमिशन मीडिया को physical Layer द्वारा डिफाइन किया जाता है |

Data rate :

दो डिवाइस के बीच होने वाले डाटा ट्रांसमिशन में डाटा सेंड करने का रेट क्या होगा मतलब कि एक सेकंड में कितने डाटा बिट सेंड करने है यह सब physical Layer डीडे करती है | फिजिकल लेयर ही डाटा ट्रांसमिशन रेट control करती है |

physical topology :

यहाँ पर ट्रांसमिशन में participate करने वाली सभी डिवाइस के बीच एक नेटवर्क establish करने के लिए physical Layer एक topology decide करती ही और फिर उसी configuration में डिवाइस के बीच डाटा ट्रांसमिशन होता है | ये टोपोलॉजी कोई भी टोपोलॉजी हो सकती है जैसे कि star topology, Ring topology, Mesh topology, एंड बस टोपोलॉजी|

Line configuration :

ये दो तरह के configuration होते है एक तो है Point to Point configuration और दूसरा है multi -Point configuration | यह configuration यह decide करते है कि सभी connecting devices Transmission मध्यम से किस तरह जुड़ेगी |

Point to Point configuration में दो devices एक dedicated लिंक के जरिये जुडी होती है जबकि multipoint configuration में बहुत सारी डिवाइस एक लिंक को शेयर करती है |

Data link Layer :

OSI मॉडल में Data link लेयर एक बहुत ही महत्वपूर्ण लेयर है और इस लेयर में network लेयर द्वारा raw डाटा ट्रांसफर किया जाता है और फिर Data link लेयर में उस डाटा को एरर फ्री बनाने और डाटा फ्लो कण्ट्रोल का काम होता है | Data link लेयर के अंदर node to node डिलीवरी होती है | Data link लेयर के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है |

Framing :

Network Layer द्वारा डाटा बिट स्ट्रीम को Data link Layer में भेजा जाता है और Data link Layer उसे manageble Data frames में कन्वर्ट कर देता है |

physical addressing :

Data link Layer फ्रेम्स के अंदर एक header को क्रिएट करता है और उसमे सेन्डर का फिजिकल एड्रेस और रिसीवर का फिजिकल एड्रेस include करता है | और जब डाटा फ्रेम सेन्डर के नेटवर्क से डिलीवरी के लिए दूसरे नेटवर्क में चला जाता है तब Receiver address के जरिये वह नेटवर्क तो नेटवर्क ट्रेवल करके फाइनली रिसीवर के physical address तक पहुँचता है |

Flow control :

यह जरुरी नहीं कि सेन्डर जितना डाटा एक बार में ट्रांसमिट कर रहा है वह रिसीवर रिसीव कर पाए, ऐसे में डाटा के ओवरफ्लो की सिचुएशन बन जाती है और डाटा का loss हो सकता है | इस डाटा के फ्लो को कण्ट्रोल करने के लिए डाटा लिंक लेयर द्वारा कई सारी Data फ्लो कण्ट्रोल mechenism का use किया जाता है और डाटा के फ्लो को कण्ट्रोल किया जाता है |

Error control :

कभी कभी कुछ डाटा पैकेट डैमेज हो जाते है या फिर खो जाते है और वो रिसीवर के पास नहीं पहुँच पातें है | इस डाटा loss को रोकने के लिए Data link द्वारा Data detection और Data retransmission की mechenism को use में लाया जाता है | इससे हम damaged Data अथवा lost Data को दुबारा transmit करके रिसीवर के पास भेजते है |

access control :

अगर एक या एक से अधिक डिवाइस एक कॉमन डाटा ट्रांसमिशन लिंक को शेयर कर रही है तो यहाँ पर डाटा लिंक लेयर प्रोटोकॉल्स decide करता है कि एक समय में किस डिवाइस का कण्ट्रोल लिंक पर रहेगा | या फिर कौन सी डिवाइस लिंक को एक समय में access करेगी |

Network Layer :

OSI model के अंदर Network Layer का मुख्य काम रहता है कि वह डाटा पैकेट को source से destination तक पहुँचाना | इस ट्रांसमिशन में डाटा पैकेट बीच में बहुत सारे नेटवर्क से होकर गुजरता है | और यह सब ट्रांसमिशन को Network Layer द्वारा हैंडल किया जाता है |

अगर दो सिस्टम एक ही लिंक से कनेक्टेड है या फिर एक ही नेटवर्क में है तो फिर वहां पर Network Layer का काम नहीं होता है | पर अगर device अलग अलग लिंक से कनेक्टेड है अथवा अलग अलग Network में है तब Network Layer डाटा पैकेट को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में पहुचाने का काम करती है |

Routing :

Routing एक ऐसी प्रक्रिया है जो कि एक डाटा पैकेट को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में पहुचाने में मदद करती है | Routing में source और destination का उपयोग करके डाटा पैकेट को डेस्टिनेशन तक पहुंचाया जाता है | Routing में routers और gateway की मदद से एक बड़ा नेटवर्क बनाया जाता है जिसमे बहुत सारे छोटे छोटे नेटवर्क होते है |

logical addressing :

जब तक पैकेट same नेटवर्क में ट्रेवल करता है तब तक वह Data link द्वारा कि गयी physical addressing का उपयोग करता है | पर जैसे ही पैकेट एक Network बाउंड्री के बहार जाता है तो उसमे एक header Network Layer द्वारा add किया जाता है जिसमे source और destination का logical address होता है | जिससे कि वह कई नेटवर्क से होते हुए अपने destination Network तक पहुंच जाता है |

Transport Layer :

जहाँ पर Network Layer का काम source से destination Network तक एक individual डाटा पैकेट की end to end delivery सुनिश्चित करना है | वहीँ पर transport Layer का काम पूरे मैसेज की end to end delivery source से destination तक करवाने का काम होता है |

Segmentation and reassembly :

यहाँ पर मैसेज को कई transmitable segments में डिवाइड किया जाता है और उसमे sequence number ऐड किये जाते है, इससे होता यह है की जब यह डाटा सेगमेंट रिसीवर के पास पहुंचते है तो इन्हे reassemble करना आसान हो जाता है और lost segment को identify करना और replace करना आसान हो जाता है |

Error control :

Data link की तरह यहाँ पर भी Error control होता है, पर यहाँ पर single link पर न हो कर end to end पूरे message के लिए होता है | transport Layer ensure करती है कि सेन्डर द्वारा भेजा गया पूरा मैसेज रिसीवर के पास पहुंचे | इसके लिए ज्यादातर Error वाले डाटा को retransmit किया जाता है |

Flow control :

Data link की तरह यहाँ पर भी Data Flow control होता है पर यहाँ पर एक सिंगल लिंक पर न होकर end to end Data Flow control होता है |

service Point addressing :

Sender to Receiver पैकेट डिलीवरी का मतलब बस यह नहीं होता कि एक कंप्यूटर सिस्टम से दूसरे कंप्यूटर सिस्टम पर डाटा भेजना बल्कि एक कंप्यूटर की एक specific process को दूसरे कंप्यूटर की एक specific process तक भेजना |
इसके लिए transport Layer हर Data pakcet में एक header add करता है और उसमे एक service Point address (पोर्ट address) डालता है |

Network Layer एक मैसेज को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर भेजता और रिसीव करता है | और transport Layer का काम एक प्रोसेस को दूसरी प्रोसेस तक भेजना है |

connection control :

transport Layer कनेक्शन दो तरह के हो सकते है एक है connectionless और दूसरी connection oriented | connection less के अंतर्गत transport Layer बिना connection estabilished किये डाटा पैकेट को independly destination साइड transport Layer पर receive करती है |

connection oriented में transport Layer Data सेंड करने के पहले destination machine से connection estabilished करती है और फिर पूरा डाटा ट्रांसमिट होने के बाद कनेक्शन terminate हो जाता है |

session Layer :

session Layer को Network Dialog controller भी कहा जाता है | इसका काम communication devices के बीच intraction established करना, synchronise karna , और मेन्टेन करना है | session Layer की कुछ स्पेसिफिक रिस्पांसिबिलिटी निम्नलिखित है |

synchronization :

इसके अंतर्गत session Layer डाटा बिट के अंदर चेक पॉइंट(synchronization point) add कर देतीं है, और जब डाटा सेंड होता है तो हर चेक पॉइंट पर rukkar डाटा और acknowledgement को वेरीफाई किया जाता जाता है , और फिर आगे का बचा डाटा सेंड किया जाता है |
एक्साम्प्ले के लिए मान लीजिये हम एक 3000 pages की बुक सेंड कर रहे है ऐसे में यहाँ पर सेशन लेयर हर 200 page पर एक चेक पॉइंट ऐड कर देती है | तो अब हर 200 पेज पर हम सुनिश्चित करेंगे कि इतने पेजेज के acknowledgement रिसीव हुए कि नहीं | अगर सब कुछ ठीक होता है तो हम फिर आगे का डाटा सेंड करते है |

Dialog Control-डायलॉग कण्ट्रोल:

इसके तहत session Layer दो सिस्टम को Dialog में enter करने की परमिशन देता है| और यहाँ पर दो प्रोसेस आपस में या तो half -duplex mode में communication कर सकते है या फिर full duplex मोड में communication कर सकते है |

Presentation Layer-प्रेजेंटेशन लेयर:

presentation Layer दो सिस्टम के बीच एक्सचेंज की जाने वाली इनफार्मेशन का syntax और symantic चेक करती है | presentation Layer की मुख्य responsibility निम्नलिखित है |

Encryption-एन्क्रिप्शन:

Sender द्वारा भेजे जाने वाले मैसेज की प्राइवेसी maintain करने के लिए मैसेज को encrypt करके दूसरे फॉर्म में बदल दिया जाता है | और Receiver end पर इसे दुबारा decrypt करके original फॉर्म में बापिस retrieve कर लिए जाता है |

Translation-ट्रांसलेशन:

आमतौर पर दो सिस्टम के बीच होने वाले इनफार्मेशन (Process) character string और नंबर के फॉर्म में होती है, पर यह इनफार्मेशन ट्रांसमिटेड होने से पहले बिट स्ट्रीम में चेंज की जाती है |

अलग अलग कंप्यूटर अपना अपना encoding सिस्टम use करते है इसलिए सेंडिंग और रिसीविंग के टाइम इनमे interoperatibility बनाने की जिम्मेदारी presentation Layer की होती है |

presentation Layer Sender dependent information को एक common फॉर्मेट में कन्वर्ट करता है और रिसीविंग के टाइम यह उस common format को Receiver dependent information में कन्वर्ट करता है |

Compression :

इस Compression प्रोसेस के तहत हम ट्रांसमिशन के टाइम sending bits को compress कर देता है | इसका उपयोग मुख्य तौर पर multi media Data Transmission के वक़्त ज्यादा होता है जैसे की हम बहुत सारा text , audio , और video को भेजते है |

application Layer :

यह applicatoin लेयर OSI लेयर का सबसे बहरी पार्ट और लेयर होती है और यह सीधे users के contact में होती है या फिर यूजर को एक Network में इनफार्मेशन भेजने और enter कराने का एक एंट्री पॉइंट होती है | यह सर्विस निम्न सर्विस को सपोर्ट करती है जैसे कि electronic मेल, File access और File transfer | application Layer की और services निम्नलिखित है :

File transfer, access and management-फाइल ट्रांसफर, एक्सेस एंड मैनेजमेंट:

इसके तहत यह Layer User को परमिशन देती है है कि वो रिमोट कंप्यूटर में रखी फाइल को access कर सकता है (अपडेट करने और पढ़ने के लिए ). एक User रिमोट कंप्यूटर से फाइल को retrieve भी कर सकता है | और रिमोट कंप्यूटर पर फाइल को control अथवा manage कर सकता है |

Network Virtual Machine-नेटवर्क वर्चुअल मशीन:

यह एक virtual Network software होता है जो कि remote computer में लॉगिन करने में मदद करता है | यूजर इस virtual software के जरिये एक remote host से सीधा जुड़ सकता है |

Directory Service-डायरेक्टरी सर्विस:

इस application Layer की मदद से आप distributed डाटाबेस और कई सारे object और services कि information को easily access कर सकते है |

Mail Service-मेल सर्विस:

यह एप्लीकेशन ईमेल forwarded स्टोरेज के लिए एक basis प्रोवाइड करवाता है |

What is the OSI layer for example?/ What is the ISO layer?/ What is the OSI model and how it works?/ How do OSI layers interact with each other?/ What are the 7 layers of the OSI model?

इन सारे प्रश्नो के उत्तर के लिए निचे दिए गए blog को पढ़े|

OSI Model In Detail…

What are the layers of TCP IP?/ What are the 5 layers of TCP IP?/ What are the differences between TCP/IP and OSI Model?

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TCP/IP vs OSI Model: OSI Model Layers Functions in Hindi

इन सारे प्रश्नो के उत्तर के लिए निचे दिए गए blog को पढ़े|

TCP/IP Model in detail…

Difference between OSI and TCP/IP model…

Which layer of the OSI model is the most important?/ OSI model में कौन सी लेयर सबसे ज्यादा important है?

OSI मोडल में वैसे तो सभी layers का अपना अपना महत्व है पर network layer को सबसे important मान सकते है | Network लेयर का काम रियल टाइम प्रोसेसिंग को हैंडल करना है और node to node communication करवा कर packet को source से destination तक सफलतापूर्वक भेजना है |

Which is the first layer of the OSI model?

Physical Layer OSI model की first layer है |

Conclusion :

तो इस ब्लॉग(osi model layers functions in hindi) में हमने OSI model और उसकी Layer function को डिटेल में एक्स्प्लोर किया | हमने यहाँ पर देखा कि OSI model में प्रेजेंट 7 layers के function कौन कौन से है , और वे communication establish करने में क्या क्या भूमिका निभाते है | OSI मॉडल का फुल फॉर्म होता है open system interconnection |

तो इस ब्लॉग पोस्ट में हमने OSI model से रिलेटेड बहुत अच्छे अच्छे प्रश्नो का अध्यन किया जैसे कि What is the function of each layer of the OSI model, What is a function of layer 2 of the OSI model, What is the function of data link layer in OSI model, What is the main function of the transport layer in OSI model, What is OSI layer with an example, What is ISO layer, Why is OSI model important, What is OSI model explains, Why do we use layering, What are the 5 layers of TCP IP.

इस ब्लॉग को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते a5theorys@gmail.comपर ईमेल लिख सकते है|

आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट ‘OSI Model In Hindi?/ OSI Model क्या है?/ OSI Model Layers के क्या क्या functions है ?/OSI Model Layers Functions in Hindi’ को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|

आपका समय शुभ हो|

Anurag

I am a blogger by passion, a software engineer by profession, a singer by consideration and rest of things that I do is for my destination.

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