Introduction
हेलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट(History of HTML In Hindi) में हम आपको एक बहुत ही useful और interesting टॉपिक “HTML” के बारे में विस्तार से बताने वाले है |
HTML लैंग्वेज का उपयोग हम वेबसाइट बनाने के लिए करते है | आज के इस technical दौर में आप में बहुत से लोग रोज़ कोई न कोई अपने काम की वेबसाइट को विजिट करते होंगे |History of HTML In Hindi|

History of HTML In Hindi/क्या आपने कभी यह सोचा है कि एक्चुअल में यह वेबसाइट पेजेज कैसे बनते हैं?
अगर आप अभी भी नहीं जानते है तो फिर हमको आज इस ब्लॉग में विस्तार से हटम्ल के बारे में बताते है | आज तक की कोई भी वेबसाइट जो आप विजिट कर चुके है या फिर अभी विजिट कर रहे है|
हर वेबसाइट को बनाने के लिए जो फाउंडेशन लैंग्वेज होती है वो होती है html | html का फुल फॉर्म होता है “Hypertext markup language”|
HTML लैंग्वेज का उपयोग ही हम web pages और web applications को डिज़ाइन अथवा बनाने के लिए करते है |
एक वेबसाइट के अंदर यह एक ढांचे की तरह होता है जिसमें हम कंटेंट को बड़े ही सलीके के साथ रखते हैं।
कुछ एलिमेंट्स जिन्हें हम html की मदद से अपने पेज पर define करते हैं वो हैं headings, paragraphs, links, and images , etc.|
HTML को आये काफी टाइम हो चूका है, जैसे कि इसकी शुरुआत 1990s से ही हो गयी थी और उस टाइम पर इसे scientific documents को शेयर करने के लिए उपयोग में लिया जाता था |
पर आज की डेट में यह लैंग्वेज बहुत सारे updation के बाद बहुत ही पावरफुल लैंग्वेज हो गयी है |
आज html के उपयोग से बहुत ही इंटरेस्टिंग, अमेजिंग, web applications और web pages develop किये जा रहे है जिसे आप इस दुनिया में कहीं से भी बैठ कर आसानी से access कर सकते है |
सबसे पहले आपको html की पूरी journey को समझना पड़ेगा तभी आप समझ पाएंगे कि html में इतने सारे टैग्स क्यों है, और कैसे आज के समय पर हम modern लुक के लिए उसका बेहतर use कर रहे है |
तभी आप यह भी समझ पाएंगे कि आज के समय में web standard पहले की अपेक्षा इतना important क्यों है ?
तो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट(History of HTML In Hindi) में हम html यात्रा करवाने वाले है जहाँ पर हम इसकी हिस्ट्री के बारे में विस्तार से जानेगे फिर चाहे वो बिलकुल शुरूआती html लैंग्वेज हो जहाँ पर कुछ गिने चुने हुए tags ही use होते थे|
या फिर वो आज कल के HTML versions हो जो थोड़ा ज्यादा जटिल हो गए है |और इसके साथ ही हम html लैंग्वेज के संभावित फ्यूचर स्कोप और updation के बारे में भी discuss करेंगे |
The Early Years: HTML 1.0 and 2.0
HTML 1.0 (1991-1993)
html की Actual स्टोरी सं 1989 में ही Sir Tim Berners-ली के साथ शुरू होती है | जो कि CERN (the European Organization for Nuclear Research) में एक साइंटिस्ट थे|
सबसे पहले इन्होने ही एक ऐसा सिस्टम बनाया था जिसकी मदद से hypertext की मदद से scientist लोग अपने डाक्यूमेंट्स को इंटरनेट पर एक दूसरे के साथ शेयर कर सके|
इसके बाद 1991 में इन्होने एक documents को लिखा जिसका नाम था "html Tags"|
इस डाक्यूमेंट्स के अंदर इन्होने 20 elements को describe किया जिनकी मदद से वेब पेजेज को markup कर सकते थे |
और इसे ही html के सबसे पहले version रूप में मन गया था हलाकि इसे कभी officially standardized नहीं किया गया था|
यह बहुत ही बेसिक लैंग्वेज थी जिसमे आप कुछ elements को जैसे कि headings , paragraphs, और सबसे important hyperlinks (<a> tags-) का उपयोग करके अपने सिंपल डाक्यूमेंट्स को डिज़ाइन कर attractive बना लेते थे|
Hyperlinks इसमें बहुत ही important एलिमेंट्स था जिसकी मदद से आप documents को link कर सकते थे और आसानी से एक डाक्यूमेंट्स से दूसरे पर कनेक्ट कर सकते थे|
पर images, tables, or styling को यह html language बिल्कुल भी support नहीं करती थी |
HTML 2.0 (1995)
समय के साथ जैसे ही web का आकार बढ़ रहा था वैसे ही अब नए standard की ज़रूरत भी महसूस हो रही थी|
और फिर 1995 में IETF (Internet Engineering Task Force) द्वारा html २.0 version को published किया जाता है इसे हम RFC 1866 के नाम से भी जानते है|
Actual में यही html का पहला official specification अथवा वर्शन था |और इस version को लांच करने के पीछे जो सबसे पहला purpose common features को formalize करने का था जो पहले से ही उपयोग किया जा रहे थे |
HTML2.0 version का जो सबसे अमेजिंग डिस्कवरी थी वो थी forms ( (<form>, <input>, <textarea>)) का introduction और यह एक game changer की तरह साबित हुआ|
Forms की मदद से पहली बार कोई भी users वेबसाइट से interac कर सकते थे|
Forms के साथ कुछ features जैसे कि login pages , search bars , और feedback form users के लिए बहुत ही नए और amazing ऑप्शन थे experience करने के लिए |
The W3C Takes Over: HTML 3.2 and 4.0
समय के साथ html बदलता रहा और अब बारी थी कुछ बड़े बदलाव की |
सं 1996 में (W3C) World Wide Web Consortium जिसे Tim Berners-Lee ने ही खोजा था ने इस reponsibility को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिए था कि हटम्ल के नए standard को अब कैसे develop किया जायेगा |
HTML 3.2 (1997)
january 1997 में W3C ने html3.2 एक नए वर्शन को लांच किया| और यह version लॉनच फ्यूचर के लिए एक बहुत ही amazing step था |
इस version को बनाने का main purpose था उन सभी फीचर्स को html के साथ जोड़ना जो कि उस समय के browsers के द्वारा उपयोग किये जा रहे थे |
उस समय browsers के बीच (Netscape vs. Internet Explorer ) बहुत कम्पटीशन चल रहा था अलग अलग फीचर्स को add करने को ले कर |
जिनमे से कुछ मुख्य features है:-
Tables: tables उस समय एक बहुत ही क्रन्तिकारी फीचर था जो कि डेवेलपर्स को बहुत ही आसानी के साथ डाटा को row और column में structured करने में मदद करता था |
और उनमे से कुछ चतुर डेवेलपर्स ने बहुत ही जल्दी यह जान लिया था कि tables को सिर्फ डाटा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे वेब पेज के लेआउट को एक structure में रखने के लिए भी use किया जा सकता है| जिसमे कई सारी rows और column हो सकते है |
Support for scripting: <script> tag को बना लिया गया था जिससे वेब पेज पर कुछ सिंपल स्क्रिप्ट को रन किया जा सके |
Text flow around images: image के इर्द-गिर्द कंटेंट को कैसे मैनेज करना है इस पर भी काफी हद तक कण्ट्रोल पा लिया गया था |
HTML 4.0 (1997) and HTML 4.01 (1999)
Dec 1997 में HTML4 .0 version को रिलीज़ किया गया और फिर इसी version में कुछ छोटे-मोटे पर महत्वपूर्ण बदलाव करके एक revision version 4.01 को 1999 में लांच किया गया|
वेब डेवलपमेंट फिलॉसफी में एक बहुत बड़े शिफ्ट का श्रेय इस version को दिया गया |
और इस version का main काम standard पैटर्न को हटाने का था|
और फिर इसे हटाकर HTML डाक्यूमेंट्स के representation को CSS से separate कर दिया गया |
और इस transition को हैंडल करने के लिए आईये इसके तीन मुख्य प्रकार कुछ इस तरह है :
Strict: सभी presentational elements(like <font> and <center>) को deprecate कर दिया गया|और इसकी जगह CSS ने ले ली |
Transitional: Backward compatibility के लिए deprecated presentational elements को allow कर दिया गया |
Frameset: यह सिर्फ उन documents के लिए था जो बहुत सारे pages को display करने के लिए frames का उपयोग करते थे|
इस version को लाने के पीछे main मकसद था accessibility को अच्छा करना, नए attributes को introduce करना|
और कुछ ऐसे नयी techniques को ईज़ाद करना जिससे उन users के लिए कुछ मदद हो सके जिन्हे कुछ disabilities है |
The XML Era: XHTML 1.0 and 1.1
जैसे ही web की दुनिया थोड़ी बड़ी हुई, W3C ने एक नए stricter syntax rules of XML (eXtensible Markup Language) को HTML की दुनिया में introduce किया|
और फिर इन दोनों के मिलन से नयी language form बनी XHTML|
XHTML 1.0 (2000)
Actually, में जो XHTML 1.0 जो है वो HTML4.01 का ही पुनर्निर्माण था जिसे XML के rules का उपयोग करके बनाया गया था |
इसे सं 2000 में W3C की recommendation के तौर पर publish किया गया था| और इसका main purpose था एक ऐसे stricter को क्रिएट करने का था जो HTML के एक well-formed version की तरह ही हो |
और इस version को machines ((like browsers and other parsers)) बहुत आसानी के साथ समझ सके और process कर पाएं |
HTML 4.01 से यह किस तरह अलग है :
सभी elements और attributes के नाम lowercase में ही होने चाहिए
सभी elements properly closed होने चाहिएe.g., <p>Some text</p>, and empty tags like <br> became <br />).
सभी attribues की values quotes "" के अंदर ही होनी चाहिए |
XHTML 1.1 (2001)
XHTML 1.1 को मई 2001 में रिलीज़ किया गया था और ये और भी ज्यादा stricter था| इसे और भी modular होने के लिए डिज़ाइन किया गया था|
इसके अंदर किसी भी डॉक्यूमेंट के text /HTML होने की ability को खत्म किया गया था| और इसे xhtml+xml डाक्यूमेंट्स की तरह serve किया गया था|
पर इस कारण से बहुत से compatibility issues देखने को मिले थे मुख्यतः internet explorer के साथ जो कि यह MIME टाइप को handle नहीं कर पा रहा था |
और यहीं से इस XHTML के अंत की शुरुआत हो गयी थी |
XHTML 2.0 (Abandoned)हालांकि W3C ने strictness के पथ पर आगे बढ़ते हुए एक नए प्रोजेक्ट को शुरू किया जो था XHTML 2.0 जिसकी शुरुआत 2002 में हुई थी|
यह एक पूरी तरह से एक pure और क्लीन XML language थी पर HTML के पिछले versions के साथ यह compatible नहीं थी |
browsers वेंडर्स और वेब डेवलपमेंट कम्युनिटी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया क्योकि उन्हें यह version बिलकुल भी प्रैक्टिकल और रियल नहीं लगा |
इसलिए कई सालो के काम और कई सारे ड्राफ्ट्स के बाद इस प्रोजेक्ट को officially 2009 में छोड़ दिया गया |
The Modern Web: HTML5
तो दोस्तों यहाँ से हटमल की एक नई कहानी शुरू होती है | जब W3C अपने xHTML 2.0 वर्शन पर फोकस कर रहा था जबकि वह एक impractical वर्शन साबित हो चुका था |
पर इस सब से ब्राउज़र वेंडर्स((Apple, Mozilla, Opera)) बहुत ही frustrated हो गए थे और इस सब के चलते उन्होंने 2004 में अपना एक अलग ही ग्रुप बना लिया WHATWG (Web Hypertext Application Technology Working Group).
उन्होंने एक नए specification को बनाने का काम चालू कर दिया जिसे उन्होंने “Web Applications 1.0,” नाम दिया|
यह एक तरह से html का ही एक्सटेंडेड वर्शन था और backward compatibility को भी पूरी तरह से support करता था |
आगे चलकर W3C को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने उसे माना भी | इसके बाद उन्होंने html group को भंग कर दिया|
और WHATWG के साथ मिलकर काम करना चालू कर दिया और उसके specification को develop करने में मदद करने लगे जिसे आगे चलकर HTML5 के नाम से जाना गया |
First Public Draft Of HTML5(2008):
W3C ने HTML5 का पहला पब्लिक ड्राफ्ट प्रस्तुत किया |
The “Living Standard”: WHATWG ने HTML5 को एक नए नाम से डिफाइन किया “Living Standard”| इसका मतलब यह था कि यह कभी “finished” नहीं माना जायेगा |
यह वीरसिओं सतत अपडेट और improve होता रहेगा | W3C Recommendation (2014): Oct 2014 को W3C ने HTML5 को एक stable वर्शन की तरह published कर दिया |
HTML5 के कुछ के फीचर्स :
HTML5 अपने आप में एक अल्टीमेट वर्शन था जिसे एक कोर सिद्धांत के साथ डिज़ाइन किया गया था और वह यह था कि यह version हमेशा ही backward compatible रहेगा |
और यह version robustness के सिद्धांत को भलीभांति फॉलो करता था “Be conservative in what you do” जिसे browsers हमेशा ही फॉलो करते थे |
और इसका सीधा मतलब यह थे कि कोई भी sloppy और old हटम्ल कोड भले ही वो 90s का ही क्यों न हो मॉडर्न browsers पर अच्छे से काम करेगा |
कुछ नए और बड़े फीचर्स:
Semantic Elements:
कुछ नए टैग्स को introduce किया गया जैसे कि header, footer, article, section, and nav…| यह tags वेब पेज के स्ट्रक्चर को एक नया ही अर्थ प्रदान कर रहे थे |
Developers, search engines (SEO), and assistive टेक्नोलॉजीज के लिए इस वर्शन को उपयोग करना एक बहुत ही सुखद अनुभव था |
Multimedia Support:
Audio और video tags के आतें ही हमें मीडिया को अपनी मनचाही जगह पर जोड़ने के लिए एक standard तरीका मिल चूका था | अब हमें किसी third -party plugins जैसे कि Flash पर depend रहने की कोई जरुरत नहीं थी |
Graphics and Animation:
Canvas elements और Scalable Vector Graphics (SVG) के सपोर्ट से हम अब सीधे browsers पर ही rich ग्राफ़िक्स और animations को एक्सपीरियंस कर सकते थे |
New Form Controls:
Forms में कुछ नए input टाइप्स को जोड़ दिया गया था जैसे कि email, date, number, range, tel, and url और इत्यादि…|
और यह इनपुट टाइप बिल्ट-इन वेलिडेशन के साथ थे और users को अलग अलग डिवाइस पर एक बहुत ही अच्छा एक्सपीरियंस प्रोवाइड करवाते है |
APIs:
HTML5 में एक बहुत ही नयी चीज़ आयी है वो है javascript APIs का उपयोग| जिसे उपयोग करके आप बहुत ही अमेजिंग functionality को अपने पेज पर जोड़ सकते हो |
जैसे कि geolocation, web storage (offline data), and web workers (background processing).
The Ongoing Evolution: HTML5.1, 5.2, 5.3
HTML5 जैसे ही W3C की recommendation से पब्लिश हुआ वैसे ही W3C ने भी अपने काम को इसके ऊपर जारी रखा |
और इसके बाद इसके point versions launch किये जिनमे कुछ नए फीचर्स को ऐड किया गया और existing फीचर्स को थोड़ा और refine किया गया |
HTML5.1:
HTML5.1 को W3C द्वारा 2016 में पब्लिश किया गया | इस version के अंदर और जैसे नए टैग्स को जोड़ा गया जो कि expandable widgets को create करने में सहायक होते है |
और responsive इमेज को हैंडल करने के लिए टैग को भी जोड़ा गया |
HTML5.2:
html5.2 को 2017 में recommend किया गया | जिसमे native मॉडल dialogs के लिए टैग को जोड़ा गया |
HTML5.3:
html5.3 जो है वो सबसे नया point version है जिसे W3C द्वारा पब्लिश किया गया| और इस version में भी कुछ नए फीचर्स को जोड़ा गया और कुछ existing फीचर्स को और भी अच्छा किया गया |
ये सब incremental Versions के आने के बाद भी इसका जो true source है वो वही रहता है WHATWG’s “Living Standard,”
और यह लगातार फीचर्स को evlove करते रहता है जैसे कि secure, cross-platform payment requests और form handling को improve करना इत्यादि|
History of HTML In Hindi/HTML Versions का तुलनात्मक विश्लेषण:
html के इस evolution प्रोसेस को और अच्छे से समझने और visualize करने लिए हम आपके लिए यहाँ पर टेबल फॉर्मेट में सभी बड़े html version का तुलनात्मक विवरण दे रहे है:
| Version | Year | Key Authority | Defining Features & Significance |
|---|---|---|---|
| HTML 1.0 | 1991 (Draft) | Tim Berners-Lee (CERN) | The initial draft with ~20 tags. Allowed for headings, paragraphs, and hyperlinks. No official standard -4-7. |
| HTML 2.0 | 1995 | IETF | The first official standard (RFC 1866). Introduced forms (<form>, <input>), enabling user interaction and data submission -1-8. |
| HTML 3.2 | 1997 | W3C | The first W3C recommendation. Added tables (used for layout), scripting (<script>), and text flow around images, reflecting browser vendor practices -1-4. |
| HTML 4.01 | 1999 | W3C | A major milestone promoting structure vs. presentation. Deprecated <font> in favor of CSS. Introduced three conformance “flavors”: Strict, Transitional, and Frameset -1-8. |
| XHTML 1.0 | 2000 | W3C | A reformulation of HTML 4.01 with XML syntax rules. Required lowercase tags, mandatory closing of elements, and quoted attributes -1-2. |
| XHTML 1.1 | 2001 | W3C | A stricter, modular version of XHTML. Could not be served as text/html, leading to major compatibility issues and its eventual demise -1-2. |
| HTML5 | 2014 | WHATWG & W3C | A game-changer designed for backward compatibility. Introduced semantic tags (<header>, <footer>), native audio/video, <canvas> for graphics, and new form input types -2-4. |
| HTML 5.1 | 2016 | W3C | An incremental update to HTML5. Added features like <details>/<summary> for expandable content and improved responsive image handling with the <picture> element -7. |
| HTML 5.2 | 2017 | W3C | Another incremental update. Introduced the <dialog> tag for native modal dialog boxes and further refinements to existing elements -7. |
| HTML 5.3 | 2018+ | W3C | The latest point version from the W3C, continuing to refine the spec with new features and improvements, while the WHATWG maintains the official “Living Standard” -4. |
Conclusion :
तो दोस्तों आशा करता हूँ कि आपने इस ब्लॉग पोस्ट(History of HTML In Hindi) को बहुत ही एन्जॉय किया होगा, और इससे आपको बहुत कुछ नया सीखने को मिला होगा | HTML की पूरी journey तब से लेकर अब तक बहुत ही मजेदार रही है, जिसमे innovation, compromise, और resilience तीनो थे| Tim Berners-Lee के text -only version से लेकर आज के HTML तक HTML हमेशा evolve ही होता रहा है और सभी developers और users की जरूरतों को पूरा किया है | और HTML की सबसे अच्छी बात यह रही है कि इसने हमेशा ही backward compatibility को support किया है | कहने का मततब यह है कि पुराने बने web pages भी आज के अथवा फ्यूचर के ब्राउज़र में बहुत अच्छे से run हो पातें है या पाएंगे |
चाहे आप शुरूआती डेवलपर हो या फिर कोई trained developer अगर आपको HTML की हिस्ट्री की अच्छी समझ है तो फिर आप बहुत अच्छा, semantic (logical), और फ्यूचर-फ्रेंडली कोड लिख सकते है |और इसी के साथ साथ हटम्ल भी evolve होता रहता है एक ऐसे foundational language रहते हुए जो हम सभी को एक दूसरे से connect करती है |
इस ब्लॉग(History of HTML In Hindi) को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते support@a5theory.comपर ईमेल लिख सकते है|
आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट(History of HTML In Hindi) को खूब एन्जॉय किया होगा|
आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|
आपका समय शुभ हो|
