Circuit Breaker In Share Market In Hindi?

हेलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट(Circuit Breaker In Share Market In Hindi) में मैं आपको शेयर मार्किट के अंतर्गत Circuit breaker के बारे में हिंदी में जानकारी दूंगा| Circuit breaker जो है वो prices का एक रेंज होती है अथवा एक band होता है जिसके बीच की वैल्यू पर Share market उस पूरे दिन के लिए fluctuate करता है |

Share market में Circuit दो तरह के होते है | एक होता है Upper Circuit और दूसरा होता है Lower Circuit | यह जो भी सर्किट होते है वो actually में प्राइस की एक वैल्यू होती है | जैसे कि एक प्राइस की lower value होती है और एक प्राइस की Upper value होती है |Circuit Breaker In Share Market In Hindi|

और इन दोनों price value के बीच Share market एक दिन के लिए fluctuate करता है अथवा price मूवमेंट करता है |Circuit Breaker In Share Market In Hindi|

जैसे example के लिए अगर आज के दिन के लिए किसी एक Stock ABC की जो Upper Circuit है वो है 10 rupees और जो lower किर्कित है वो है 5 rupees तो फिर जो आज के दिन Share market में इस स्टॉक के लिए expected प्राइस मूवमेंट होगा वो 5 से लेकर 10 rupees के बीच ही होगा |

पर यदि किसी भी case में अगर यह price value Lower अथवा Upper Circuit value को touch कर जाती है | तो फिर ऐसी कंडीशन में इस स्टॉक के लिए ट्रेडिंग कुछ समय के लिए स्टॉप कर दी जाती है |

अब यह trading कितने समय के लिए बंद की जाती है यह भी depend करता है की Upper Circuit और Lower Circuit दिन में कितने टाइम touch होता है अथवा break होता है |

वैसे अगर मोटा मोटी बात करें तो Circuit break करने वाले Stock की trading अथवा Stock market की ट्रेडिंग को 1 घंटे के लिए बंद कर दिया जाता है |

स्टॉक मार्केट तब बंद होता है जब nifty और sensex में Circuit break होता है | कहने का मतलब Circuit break स्टॉक और Stock market दोनों के केस में हो सकता है |

पर Stock के केस में केवल उस Stock की ट्रेडिंग बंद रहती है जबकि Stock market के केस में पूरे Stock market की ट्रेड़िंग को 1 घंटे के लिए बंद कर दिया जाता है |

इस 1 घंटे में 45 min तो ट्रेडिंग बिलकुल ही बंद रहती है | और अगले 15 min Pre -open सेशन चलता रहता है और इसके बाद regular ट्रेडिंग चालू हो जाती है |

सर्किट ब्रेकर के कौन कौन से टाइप्स होते है ?

Circuit breaker के दो टाइप्स होते है :

Lower Circuit
Upper Circuit

Lower Circuit सबसे low प्राइस होती है और Upper circuit सबसे हाई प्राइस वैल्यू होती है | यह वैल्यू हर दिन शेयर मार्किट शुरू होने से पहले ही decide कर दी जाती है | और फिर expect किया जाता है की मार्किट आज इन्ही दो वैल्यू के बीच fluctuate करेगा |

इस Circuit breaker की वैल्यू को कौन और कैसे decide करता है ?

इस Circuit breaker की value को Stock exchange ही डीडे करती है | और generally यह 5 %, 10 %, 15 %, और 20 % के base पर होती है |

और यह percentage अथवा Circuit value किसी भी शेयर अथवा मार्किट के पिछले दिन की last वैल्यू पर लगाया जाता है |

जैसे कि मान लीजिये ABC स्टॉक के शेयर कल 100 rupees पर close हुए तो फिर 10 परसेंट के हिसाब से इस स्टॉक का कल का लोअर सर्किट होगा 90 और Upper Circuit होगा 110 rupee|

इस Lower Circuit और Upper Circuit की वैल्यू को कौन monitor करता है ?

Lower और Upper Circuit की वैल्यू को SEBI द्वारा monitor किया जाता है | SEBI द्वारा इस सर्किट ब्रेकर की वैल्यू को लगातार monitor किया जाता है | और जैसे ही कोई भी स्टॉक Lower अथवा Upper Circuit वैल्यू को touch करता है वैसे ही उस स्टॉक की ट्रेडिंग को स्टॉप कर दिया जाता है |

और फिर स्टॉक trading 1 घंटे तक बंद रहता है | जिसमे 45 min तो ट्रेडिंग पूरी तरह से बंद रहती है और और फिर 15 min के Pre open सेशन के साथ रेगुलर ट्रेडिंग चालू हो जाती है |

अलग अलग परसेंटेज सर्किट ब्रेकर के लिए अलग अलग halting होती है | अगर आप इसे detail में padhna chahte है तो फिर इस extensive ब्लॉग को padhiye |

इस Circuit breaker को लगाने के पीछे क्या purpose होता है ?

इस सर्किट ब्रेकर की मदद से हम investor और ब्रोकर दोनों को ही तगड़ा घाटा होने से बचा लेते है | अगर यह Circuit breaker न हो तो लोगो की सालो की मेहनत एक ही दिन में 0 हो सकती है |

और उसे फिर अपना पैसा बचाने का कोई भी चांस नहीं मिलेगा | और फिर investment की दृष्टि से यह सही बिज़नेस नहीं होगा और फिर लोग धीरे धीरे शेयर मार्किट में पैसा लगाना बंद कर देंगे |

अगर हम Circuit breaker नहीं लगाएंगे तो फिर कोई भी event एक तरफ़ा हो सकती है एक दिन के अंदर | पता चले सभी लोग शेयर बेचते ही जा रहे है तो ऐसे कंडीशन में शेयर्स को खरीदने वाला कोई नहीं मिलेगा |

या फिर अगर लोग शेयर को खरीदते ही जा रहे है तो ऐसे स्थिति में शेयर को बेचने वाला कोई नहीं बचेगा | तो कोई भी बिज़नेस मॉडल ऐसे नहीं चल सकता | बिज़नेस को बरक़रार रखने के लिए हमें buyer और seller के बीच प्रॉपर बैलेंस बनाने की जरुरत है |

क्या यह Circuit Stock और index दोनों पर ही लगाए जाते है ?

हाँ यह सर्किट स्टॉक्स और index (sensex और nifty) दोनों पर ही लगाए जाते है | पर जब हम स्टॉक पर सर्किट को लगाने की बात करते है तब हम इसे band कहते है और जब हम इसे इंडेक्स पर लगाने की बात करते है तब हम इसे Circuit filter कहते है |

Pre -open session क्या होता है ?

यह session इंटरनल वर्किंग के लिए होता है | जहाँ पर पुराना सब हिसाब किताब clear कर लिया जाता है | और सभी पुराने हिसाब को अपडेट कर लिया जाता है जिससे की नए transaction को प्रॉपर तरीके से किया जा सके|

इसे आप ऐसे समझ सकते है की आप ने बड़े बड़े मॉल अथवा कॉर्पोरेट कंपनी में देखा होगा जहाँ पर रोज़ का प्रॉपर काम शुरू होने से पहले एक quick मीटिंग होती है |

जहाँ पर कल के बिज़नेस अथवा काम का quick analysis किया जाता है और आगे के काम की रूप रेखा बनायीं जाती है | बस कुछ इसी तरह से Pre -open session में होता है |

Conclusion:

तो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट(Circuit Breaker In Share Market In Hindi) में हमने Circuit breaker के बारे में विस्तार से हिंदी में जाना और समझा | Circuit breaker एक band अथवा एक प्राइस रेंज होती है जिसके बीच पूरे दिन शेयर मार्किट price अथवा Stock price fluctuate करती है| और अगर किसी भी केस में यह Circuit break होता है तब ऐसे स्थिति में SEBI द्वारा स्टॉक ट्रेडिंग अथवा स्टॉक मार्किट ट्रेडिंग को कुछ टाइम के लिए स्टॉप कर दिया जाता है | और फिर कुछ समय बाद एक प्रे-ओपन सेशन के साथ रेगुलर ट्रेडिंग को फिर से शुरू किया जाता है |

इस ब्लॉग(Circuit Breaker In Share Market In Hindi) को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते [email protected]पर ईमेल लिख सकते है|

आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट(Circuit Breaker In Share Market In Hindi) को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|

आपका समय शुभ हो|

Anurag

I am a blogger by passion, a software engineer by profession, a singer by consideration and rest of things that I do is for my destination.