Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi|Share market में Lower circuit और Upper circuit क्या है?

हेलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट(Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi) में मैं आपको शेयर मार्किट ट्रेडिंग में उपयोग होने वाले Upper circuit और lower circuit के बारे में हिंदी में जानकारी देने वाला हूँ | Upper circuit और lower circuit एक stock के लिए वो लिमिट होती है जिनके cross होने पर market अथवा स्टॉक trading को कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है | कहने का मतलब की ऐसे स्टॉक की ट्रेडिंग बंद हो जाती है |

तो दोस्तों पहले तो हम इस पोस्ट(Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi) के माध्यम से समझते है कि Upper circuit और lower circuit होते क्या है ?

तो दोस्तों आपको बता दूँ कि यह lower circuit stock की minimum range होती है जिसके बाद trading को कुछ time के लिए रोक दिया जाता है|Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi|

और Upper circuit किसी भी स्टॉक की वो maximum price होती है जिसके cross होते ही ट्रेडिंग को कुछ टाइम के लिए रोक दिया जाता है |Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi|

और ऐसा इसलिए किया जाता है दोस्तों कि किसी भी शेयर में एक दिन के अंदर बड़ी गिरावट अथवा बड़ी तेज़ी न आ जाये नहीं तो ऐसे में buying और selling का बैलेंस बिगड़ने लगता है | और investors और brokers को भारी नुकसान हो सकता है |

क्योकि कभी भी कोई स्टॉक lower circuit तभी टच करता है जब लोग share को केवल बेचना चालू कर देते है और खरीदता कोई भी नहीं है | या फिर कंपनी को बहुत बड़ा घाटा होने की स्थिति में ऐसे सिचुएशन बन जाती है |

और इसी तरह Upper circuit generally तब cross हो जाता है जब लोग किसी share को केवल खरीदना चालू कर देते है और बेचता कोई भी नहीं है | अथवा कंपनी को बहुत बड़ा मुनाफा हो जाये तब यह Upper circuit की सिचुएशन क्रिएट हो जाती है |

पहले तो आपको बता दूँ कि हर मार्किट दिन शुरू होने से पहले प्रत्येक स्टॉक की प्राइस पर एक Upper circuit और lower circuit लगाया जाता है | और यह generally तीन percentage criteria में होता है 10 %, 15 %, और 20 %|

अब किस स्टॉक पर कितना परसेंटेज सर्किट लगाना है यह स्टॉक एक्सचेंज decide करता है | और इस तरह हर स्टॉक की एक रेंज होती है जिसके बीच उसे उस trading day में trade करना चाहिए |

जैसे कि example के लिए किसी कंपनी का शेयर प्राइस 100 रुपया है, और exchange उस पर volatility के हिसाब से 20 % का Upper और lower circuit लगता है तो इस शेयर की लोअर सर्किट हो जायेगा 80 रुपया और Upper circuit हो जायेगा 120 रुपया|

अब अगर stock price इस दिन के मार्किट के लिए इस रेंज के बीच चलता है तो फिर कोई प्रॉब्लम नहीं है, इसका मतलब यह है की लोग स्टॉक को बेंच भी रहे है और खरीद भी रहे है | और स्टॉक volatile बना हुआ है |

पर अगर इस दिन अगर स्टॉक प्राइस अगर lower circuit 80 रुपया cross कर लेता है अथवा Upper circuit cross कर लेता है 120 रुपया तब फिर यहाँ पर SEBI द्वारा इस स्टॉक की trading को थोड़ी देर के लिए रोक दिया जता है | और फिर कुछ टाइम के बाद इसे फिर से चालू किया जाता है |

और अगर ऐसा नहीं किया जाये तो फिर किसी भी share की वैल्यू एक दिन में ही 0 touch कर सकती है अथवा Upper circuit के केस में बहुत जायदा भी हो सकती है | जिससे कि बहुत से निवेशको को बहुत तगड़ा घाटा हो जायेगा | और stock की शेयर प्राइस disbalance हो जाएगी market में | और मार्किट बार एक दबाब क्रिएट हो जायेगा |

इसलिए lower और Upper सर्किट का उपयोग investors और brokers के हित को ध्यान में रख कर किया जाता है | जिससे कि किसी को भी तगड़ा झटका न लगे | और इस भारी उतार और चढ़ाव से मार्किट में दबाव न बने |

अब हम देखते है कि lower circuit और Upper circuit touch होने की स्थिति में मार्किट(अथवा कोई stock) को कैसे और कब तक रोका जाता है |

देखिये जैसे कि हमने ऊपर आपको तीन सर्किट percentage limit के बारे में बताया था जो थी 10 %, 15 %, और 20 %| तो यह लिमिट stock एक्सचेंज द्वारा किसी भी stock पर उसकी मार्किट volatility के हिसाब से लगाई जाती है |

अब हम सबसे पहले देखते है कि अगर कोई शेयर 10 % गिर जाता है तो क्या होता है | मतलब कि अगर उस पर 10 % का circuit लगा है और एक दिन के अंदर यह सर्किट ब्रेक हो जाता है तो फिर ऐसी स्थिति में क्या होता है |

10 फीसदी का सर्किट नियम:

अगर १ बजे के पहले किसी शेयर में 10 % की गिरावट अथवा तेज़ी आती है तो फिर उस स्टॉक ट्रेडिंग को १ घंटे तक रोक दिया जाता है जिसमे से 45min तो ट्रेडिंग पूरी तरह से बंद रहती है और फिर उसके बाद 15 min तक Pre -open सेशन होता है और इसके बाद रेगुलर मार्किट स्टार्ट होता है |

और यदि यही सिचुएशन 1 बजे के बाद बनती है तो फिर ट्रेडिंग को 30 min तक के लिए बंद कर दिया जाता है जिसमे 15 min यह पूरी तरह से बंद रहती है और 15 min Pre -open सेशन रहता है |

और अगर यह 10 % की गिरावट या तेज़ी 2 :30 के बाद बनती है तो फिर ट्रेडिंग 3 :30 तक ऐसे ही जारी रहती है |

15 फीसदी का सर्किट नियम:

इसके अंतर्गत अगर 15 फीसदी की गिरावट अथवा तेज़ी 1 बजे के पहले आती है तो फिर ट्रेडिंग को 2 घण्टे के लिए बंद कर दिया जाता है जिसमे से 1 घंटा 45 min तो पूरी तरह से ट्रेडिंग बंद रहती है और 15 min का Pre open सेशन रहता है |

और यही स्थिति अगर 1 बजे के बाद बनती है तो फिर ट्रेडिंग को 1 घण्टे के लिए बंद कर दिया जता है | जिसमे से 45 min तो पूरी तरह बंद रहता है और 15 min Pre open सेशन रहता है |

और अगर यही स्थिति अगर 2 :30 के बाद बनती है तो फिर ट्रेडिंग को 2 :30 से 3 :30 अथवा मार्किट खत्म होने तक बंद रखा जाता है |

20 फीसदी का सर्किट नियम:

अगर कोई भी स्टॉक में 20 % की गिरावट अथवा तेज़ी आ जाती है तो फिर मार्किट को उस पूरे ट्रेडिंग डे के लिए रोक दिया जाता है |

जब कारोबार को रोक दिया जाता है तो फिर दुबारा से वह फिर कब शुरू होता है ?

सर्किट लगने के बाद कारोबार कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है | और फिर 15 min के Pre open सेशन के बाद फिर से चालू हो जाता है | और फिर वह अगला सर्किट लगने अथवा दिन के अंत तक चालू रहता है जो भी पहले हो जाये |

Pre open session क्या होता है ?

आप बार बार उपर Pre open session के बारे में पढ़ रहे है और जो लोग इसके बारे में नहीं जानते है उन्हें बता दे की यह Pre open session stock market open होने से पहले exchange के अंदर होने वाली acitivity का time होता है जिसमे वो stock के buy और sell का हिसाब किताब को मैनेज करते है और दिन भर मार्किट की एक रूप रेखा तैयार करते है |

यह कुछ इसी तरह से है जिस तरह कंपनी में main काम चालू करने से पहले टीम लीड एक quick meeting लेता है | अथवा किसी स्टोर के ओपन होने से पहले वहां पर उस दिन की सारी व्यवस्था बनायीं जाती है |

क्या यह circuit केवल stock पर ही लगाए जाते है ?

नहीं यह lower circuit और Upper circuit को आप market index पर भी लगा सकते है जैसे की सेंसेक्स और निफ़्टी | अगर स्टॉक के केस में यह circuit क्रॉस होता है तो फिर उस particular स्टॉक की ट्रेडिंग बंद होती है पर अगर index के साथ ऐसा कुछ ऐसा होता है तो फिर यही सब चीज़े पुरे market पर लागू होती है | और पूरा market कुछ देर के लिए बंद कर दिया जाता है |

Quick Q&A:

What happens if a stock hits a lower circuit? | क्या होता है जब स्टॉक Lower circuit हिट करता है ?

देखिए जब स्टॉक Lower circuit हिट करता है तो इसका मतलब यह होता है की अब स्टॉक में सिर्फ selling चल रही है और कोई भी उसको buy नहीं कर रहा है | और इसी तरह जब स्टॉक upper circuit टच करता है तो फिर इसका मतलब यह होता है की स्टॉक में केवल buy हो रहा है और कोई भी शेयर को sell नहीं कर रहा है | और जैसे ही इनमे से कोई भी स्थिति आती है तो स्टॉक ट्रेडिंग को थोड़ी देर के लिए बंद कर दिया जाता है | फिर कुछ समय के बाद 15 min pre open session के साथ इसे दुबारा से खोला जाता है |

How do you sell shares on a lower circuit? Lower circuit पर आप अपने share को कैसे बेंचते हो ?

अगर स्टॉक बार बार Lower circuit टच कर रहा है तो फिर इसका मतलब यह होता है की लोग अपने स्टॉक को बेंचते ही जा रहे है और उसे खरीद कोई भी नहीं रहा है | और ऐसे स्थिति में अगर आप अपने स्टॉक को भी sell करना चाह रहे है तो फिर आप pre open session में अपने stock का sell order प्लेस कर सकते है और जैसे ही pre open session ख़तम हो जायेगा वैसे ही आपका आर्डर execute हो जायेगा |

How is circuit limit decided?| सर्किट लिमिट कैसे डीडे होती है ?

circuit limit को स्टॉक एक्सचेंज द्वारा decide किया जाता है | और यह लिमिट किसी भी शेयर की volatility रेट के आधार पर decide होती है | generally यह 5 %,10 %,15 %,20 % के लेवल पर decide की जाती है | और जब स्टॉक लोअर सर्किट टच करता है तब सिर्फ seller ही seller बचते है और जब स्टॉक upper circuit टच करता है तो सिर्फ buyer ही buyer बचते है |

Can I sell stock at the upper circuit?| क्या मैं upper circuit में शेयर को sell कर सकता हूँ?

हाँ आप upper circuit में स्टॉक को sell कर सकते है पर बुय नहीं कर सकते है | पर थोड़ी समय के बाद आप इस स्टॉक पर normal ट्रेडिंग कर सकते है मतलब खरीद भी सकते है और बेंच भी सकते है| इसी तरह Lower circuit में आप buy तो कर सकते है पर कुछ समय के लिए sell नहीं कर सकते है |

आप share market से जुड़े हुए कुछ और अच्छे blog नीचे दी हुई ब्लॉग लिंक का उपयोग करके पढ़ सकते है:

SEBI NEW MARGIN RULES IN HINDI 2021…
Difference between Intraday trading and delivery trading…
Delivery Trading vs Intraday Trading In Hindi…
Top 5 Best Demat and Trading Account In India…
Trading In Share Market In Hindi…
Mutual Fund vs Share Market…
Difference between the mutual fund and share market In Hindi…
What Is Share Market In Hindi…
What Is Share Market…
What Is NIFTY And SENSEX In Hindi…
Difference between Equity and Derivatives in Hindi…
Forex Trading In India In Hindi…
Difference Between Futures And Options In Hindi…
After Market Order In Hindi…
What Is Stop Loss In Share Market In Hindi…
Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi…
How To Convert Intraday Shares To Delivery In Hindi…
What Is Margin Trading In Hindi…

Conclusion:

तो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट(Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi) में हमने बड़े विस्तार से लोअर circuit और upper circuit के बारे में जाना और समझा| आशा करता हूँ की आपको अब यह lower circuit और Upper circuit बहुत अच्छे से समझ में आ गया होगा | यह सर्किट एक रेंज अथवा band होता है जिसके बीच में अगर कोई स्टॉक अथवा इंडेक्स एक दिन में fluctuate अथवा ट्रेड करें तो फिर कोई प्रॉब्लम नहीं है पर अगर वो इस रेंज को क्रॉस करता है तो फिर मार्किट अथवा स्टॉक ट्रेडिंग को कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है जिससे कि market में कोई drastic situation न बने और investors और brokers को भारी नुक्सान न पहुंचे |

इस ब्लॉग(Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi) को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते [email protected]पर ईमेल लिख सकते है|

आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|Lower Circuit And Upper Circuit In Hindi

आपका समय शुभ हो|

Anurag

I am a blogger by passion, a software engineer by profession, a singer by consideration and rest of things that I do is for my destination.