Difference between Equity and Derivatives in Hindi?|इक्विटी डेरिवेटिव में क्या अंतर है?

हेलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट(Difference between Equity and Derivatives in Hindi) में हम आपको stock market के अंदर एक्वीटी और Derivatives में हिंदी में अंतर बताने वाले है | Equity कंपनी के शेयर होते है जिसे investor खरीद कर उन shares के मालिक बन जाते है और फायदा होने पर उन shares को बेंच देते है | और वही दूसरी तरफ derivatives एक टाइप का security agreement होता है जिसे आप future में खरीदने या बेचने वाले है | पर आप इसके owner नहीं होते है |

दोस्तों जो लोग professional ट्रेडर्स है वो तो भलीभांति Equity और derivatives के बारे में जानते होंगे और इन पर ट्रेडिंग(Difference between Equity and Derivatives in Hindi) कर रहे होंगे | पर यह ब्लॉग पोस्ट specially उनके लिए है जो बस अभी अभी share market की फील्ड में आये है या फिर फिर जो आने की सोच रहे है |

आज जो भी नए लोग ट्रेडिंग से जुड़ रहे है तो ऑनलाइन ट्रेडिंग ही करते है | पर शुरुआत में तो trading अप्प(किसी भी ट्रेडिंग ब्रोकर की) में ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता है | इसलिए ज्यादार लोग बस delivery trading को सीख कर उसमे ही अपना luck आजमाते रहते है | हलाकि शुरुआत में ट्रेडर्स को न तो market की ज्यादा समझ होती है और न ही उन्हें ये trading transaction के बारे में और broker charges के बारे में ज्यादा पता रहता है |Difference between Equity and Derivatives in Hindi|

बहुत से लोग तो बस यही देखते है की हमने आज 5000 rupees किसी शेयर पर लगाए है तो हमें 500 -1000 तक फायदा हो जाये| और कुछ लोग इससे ज्यादा भी कमा लेते है या फिर कुछ लोग शेयर गिरने के बाद हड़बड़ी में अपने delivery शेयर को थोड़े घाटे में बेंच देते है |Difference between Equity and Derivatives in Hindi|

पर दोस्तों यह सब नार्मल है सभी trade beginer के साथ | जैसे कि एक दो शेयर खरीद कर उन्ही को दिन भर बार बार चेक करते रहना | पर यह जरुरी भी है शेयर मार्किट में पैर ज़माने के लिए शुरुआती परिस्थितियों से तो गुजरना ही होगा और ऐसे ही कर कर के आप सीखेंगे की share market में आखिर काम कैसे होता है | क्योकि शेयर मार्किट के बारे में पढ़ना और उसे actual में करना बहुत अलग एक्सपीरियंस है |Difference between Equity and Derivatives in Hindi|

तो दोस्तों आज के ब्लॉग पोस्ट में हम आपको Equity और Derivatives के बारे में जानकारी देने वाले है | अक्सर आपने अपने ट्रेडिंग apP में market के अंदर यह 3 -4 नाम जरूर देखे होंगे | जैसे कि Equity , Derivatives , commodity और currency | और broker app कोई सी भी हो यह नाम हर जगह common ही रहते है format और representation अलग अलग हो सकता है |

Difference between Equity and Derivatives in Hindi:

तो दोस्तों आईये सबसे पहले जानते है की Equity क्या होता है ?

Equity किसी भी कंपनी का एक particular शेयर है जिसे आप खरीद सकते है | और आप उस शेयर के पूरी तरह से मालिक हो जाते है | और profit होने पर जो फायदा उस कंपनी के मालिक को होता है वही फायदा आपको भी होता है |

Equity के अंदर ज्यादातर ट्रेडर या तो Equity Intraday trading करते है या फिर Equity delivery trading करते है | Equity Intraday trading के अंदर shares को एक ही दिन में खरीद कर उसी दिन market खत्म होने से पहले बेच दिया जाता है |

और Equity delivery ट्रेडिंग के अंदर आप शेयर्स को खरीद कर एक लम्बे समय तक होल्ड कर सकते है | चलिए अब बात करते है डेरिवेटिव्स की |

डेरिवेटिवेस(Derivatives) अथवा derivative trading क्या होती है ?

दोस्तों यह Derivatives trading Equity से अलग होती है यहाँ पर आप किसी शेयर को खरीद कर उसके owner नहीं बनते है बल्कि यहाँ पर आप एक contract अथवा agreement sign करते है, यह contract दो या दो से अधिक entity के बीच sign हो सकता है | इस contract के तहत आप future में किसी securities को buy अथवा sell करने का agreement करते है | और अगर उस Assets की वैल्यू में कोई rise होता है तो आप उससे अपना profit कमाते हो |

चलिए इसे और दूसरी भाषा में समझते है | Derivatives जो होते है वो दो या दो से अधिक parties के बीच का एग्रीमेंट होता है, और यह एग्रीमेंट underlying Assets से value अथवा price निकलने के लिए होता है | यहाँ पर जो कॉमन Derivatives है वो है future , option , forwards , और swaps | और इनके अंतर्गत generally stocks , bonds , currency , commodities , interest rate किसी भी underlying Assets का |

और सरल भाषा में समझे जैसे कि आज मैंने अंदाजा लगाया की अगले 6 महीने के अंदर सोने के दाम 5000 रुपया बढ़ जायेंगे और मैंने इस बात पर commodities में ट्रेड कर दिया अथवा एक agreement sign कर लिया| अब अगर सोने के दाम वाक़ई में 5000 रुपया या ज्यादा बढ़ गए तो मुझे इससे प्रॉफिट हो जायेगा | सभी Derivatives को exchange से trade नहीं किया जा सकता है | कुछ Derivatives particular institution से trade होती है |

और यहाँ पर यह Assets अथवा underlying Assets क्या होते है ?

Assets जिससे कि कोई investor अथवा trader ट्रेडिंग करके पैसा कमाता है वो है stocks , bonds , indices , currencies , और commodities जैसे की gold , silver , oil , natural gas , electricity , wheat , sugar , coffee , cotton ,etc .

Derivatives के क्या क्या फायदे हो सकते है ?

Derivatives में trading करने पर हमें निम्नलिखित फायदे हो सकते है:

रिस्क मैनेजमेंट(Risk Management):

Derivatives market में रिस्क काफी हद तक काम हो जाती है क्योकि यहाँ पर जो इन्वेस्टर्स रिस्क है वो एक इंडिविजुअल पर न हो कर उन पर shift हो जाती है जो की market में काफ़ी हैवी रिस्क लिए है | इससे जो है वो individual इन्वेस्टर के लिए काफी saftey हो जाती है |

मार्जिन ट्रेडिंग(Margin Trading) :

अगर आप Derivatives में ट्रेडिंग करते है तो वहां पर आपको margin tradig facility के लिए काफी अच्छा margin मिल जाता है और आपको पूरी capital invest करने की जरुरत नहीं होती है | और आप बहुत कम margin पर बहुत बड़ी एसेट्स वैल्यू का एग्रीमेंट करके अच्छा प्रॉफिट कमा सकते है |

आर्बिट्राज ट्रेडिंग(Arbitrage Trading):

आप किसी एक particular एक asset को एक share market जैसे कि NSE में खरीद कर उसे दूसरे शेयर में बेंच कर उनके बीच आने वाले डिफरेंस पर भी अच्छा प्रॉफिट कमा सकते है |

fluctuation से बचाव :

और इसके अलावा Derivatives trading से आप fluctuation के रिस्क को भी बहुत हद तक काम कर सकते हो क्योकि यहाँ पर आपके पास कई सारी related securities रहती है किसी भी Assets में न की किसी भी कंपनी का एक शेयर|

Physical settlement से पैसा बनाना :

बहुत से इन्वेस्टर है जो अपने लॉन्ग टर्म शेयर को रखे रहना चाहते है पर वो ये छोटे छोटे प्राइस फ्लक्चुएशन पर भी पैसा बनाना चाहते है तो फिर वे यह सब फिजिकल सेटलमेंट के जरिये कर सकते है | फिजिकल सेटलमेंट आपको idle share पर money earn करने के लिए allow करती है |

Derivatives contract के प्रकार:

Derivatives contract दो प्रकार के होते है एक है future और दूसरा है option:

Future:

future Derivatives contract के अंतर्गत बुयर फ्यूचर में एक निश्चित समय सिक्योरिटीज buy और sell करने के लिए agreement करता है | और इस future Derivatives ट्रेडिंग के अंदर investors को unlimited फायदा हो सकता है और unlimited घाटा भी हो सकता है |

Option:

दूसरी टाइप की trading होती है option ट्रेडिंग इसके अंतर्गत यहाँ एग्रीमेंट को होल्ड करना buyers का कर्तवय नहीं है बल्कि seller को उचित समय पर shares बेचने होंगे | इस type की option ट्रेडिंग में फायदा unlimited है और घाटा काम है |

आप share market से जुड़े हुए कुछ और अच्छे blog नीचे दी हुई ब्लॉग लिंक का उपयोग करके पढ़ सकते है:

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Conclusion:

तो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट(Difference between Equity and Derivatives in Hindi) में हमने Equity और Derivatives में अंतर को हिंदी में समझा | जहाँ एक ओर Equity का सीधा साधा हिसाब किताब है कि पैसे लगाओ और कंपनी के शेयर खरीदो और शेयर के दाम बढ़ने पर शेयर को बेच दो | और दूसरी तरफ Derivatives trading एक contract होता है जिसमे हम कोई भी Assets अथवा security को future में खरीदते है और बेचते है | यहाँ पर हम किसी भी Assets के price future में बढ़ने और घटने पर एक contract deal sign करते है | और अगर डील हमारे favour में रहती है तो हमें फायदा होता है और अगर नहीं रहती है तो हमें घाटा होता है | पर future एंड option में ऐसी कई तकनीक होती है जिससे हम इसमें होने वाले loss के risk को अच्छे से कवर कर सकते है | future एंड option कुछ कुछ probebility , expectation और assumption पर depend करता है |

इस ब्लॉग(Difference between Equity and Derivatives in Hindi) को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते [email protected]पर ईमेल लिख सकते है|

आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट(Difference between Equity and Derivatives in Hindi) को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|Difference between Equity and Derivatives in Hindi|

आपका समय शुभ हो|

Anurag

I am a blogger by passion, a software engineer by profession, a singer by consideration and rest of things that I do is for my destination.

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