MAC: Medium Access Control In Hindi 2020/ What do you mean by medium access control?/ MAC address क्या होता है?

हेलो दोस्तों, आज के इस ब्लॉग पोस्ट(Medium Access Control In Hindi) में मै आपको MAC sublayer व मैक(medium access control In Hindi ) प्रोटोकॉल के बारे में बताने वाला हूँ | मैक डाटा लिंक लेयर की sublayer है, और इसमें मौजूद प्रोटोकॉल्स, यह determine करने में मदद करते है कि multiaccess चैनल को एक्सेस करने के लिए कौन जायेगा अथवा कौन सा डाटा ट्रांसमिशन होगा|

सभी LANs एंड MANs में बहुत सरे डिवाइस का collection होता है जो की एक दूसरे से नेटवर्क ट्रांसमिशन capicity को शेयर करते है |

ट्रांसमिशन मध्यम को कुछ कुछ कंट्रोलिंग एक्सेस देना जरुरी होता है जिससे की वो कैपेसिटी का क्रमबद्ध तरीके से उत्तम उपयोग कर सके | मध्यम एक्सेस प्रोटोकॉल(MAC-Medium Access Control In Hindi) का यही काम है |

MAC(Medium Access Control In Hindi) प्रोटोकॉल के जो main pararmeter होते है वो है where and how

यहाँ पर where हमें बताता है कि कण्ट्रोल का क्रियान्वन distributed manner में किया गया है या centralize manner में|

decentralize network में स्टेशन ही collectivly मध्यम एक्सेस कण्ट्रोल को execute करता है, जिससे वो उस डायनामिक आर्डर का पता लगा सके जिसमे stations द्वारा ट्रांसमिशन हो रहा है |

centralize नेटवर्क में एक कंट्रोलर को नामित किया जाता है , जिसके में पास नेटवर्क को एक्सेस देने कि authority रहती है |

एक स्टेशन जो ट्रांसमिशन करना चाहता है, उसे ट्रांसमिट करने के लिए तब तक इंतज़ार करना पड़ता है जब तक उसे controller द्वारा अनुमति न मिल जाये |

एक centralize method के कुछ फायदे होते है, इनमे से कुछ निम्नलिखित है |

यह peer entities के बीच distribution coordination की मुशकिल को दूर करता है |

यह सभी stations पर अपेक्षाकृत सरल लॉजिक एक्सेस का यूज करने में सक्षम है |

कुछ चीज़ो को प्रोवाइड करने में जैसे कि प्रॉपर्टीज, overrides , guaranteed capacity , यह access या permission के ऊपर बहुत अच्छे तरह से कण्ट्रोल कर सकता है|

यह bottleneck और reducing performance कि तरह काम कर सकता है |

इसके failure का सिर्फ एक ही पॉइंट होता है , कहने का मतलब यह है कि, नेटवर्क में एक पॉइंट ऐसा है, कि अगर यह वह पर फेल होता है तो यह पुरे नेटवर्क failure का कारण बनता है|

जबकि दूसरी तरफ डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के pros और cons ऊपर बताई जानकारी कि just mirror image है |

‘How ‘ इस MAc sublayer का दूसरा parameter है, जो कि topology द्वारा constrained है|

It is a trade-off among competing factors including performance, cost and complexity. Generally, access control techniques can be categorized as being synchronous or asynchronous.

In synchronous techniques, specific capacity is dedicated to a connection. This is the same procedure used in circuit switching, frequency division multiplexing(FDM) and synchronous time-division multiplexing(TDM).

Generally, these techniques are not optimal in LANs and MANs because the requirements of the stations are unpredictable.

It is preferable to have the ability to allocate capacity in an asynchronous (dynamic) manner, more or less in response to immediate demand.

The asynchronous approach can be further subcategorized as round-robin, reservation, and contention.

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आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट ‘MAC In Hindi – Medium Access Control In Hindi’ को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|

आपका समय शुभ हो|

Anurag

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