Framing: Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi.

हेलो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट(Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi) में मैं आपको Framing methods के बारे में हिंदी में जानकारी देने वाला हूँ | यह Framing का process डाटा लिंक लेयर में डाटा पैकेट्स के साथ किया जाता है | और हम यहाँ इस ब्लॉग में डिसकस करने वाले है की Framing तकनीक में कौन कौन से methods का उपयोग करते है |

इस ब्लॉग पोस्ट(Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi) के अंदर हम Framing और Framing methods से रिलेटेड कुछ और महत्वपूर्ण प्रश्नो को भी discuss करेंगे जैसे कि:

What is framing in the data link layer?
What are framing and its methods?
What are the types of framing?
What are the protocols of the data link layer?

Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi

What are the Framing methods for Framing in data link layer ?| डाटा लिंक लेयर Framing के लिए कौन कौन से methods का उपयोग करती है?| Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi?

डाटा लिंक लेयर का काम होता है फिजिकल लेयर से डाटा को रिसीव करना और फिर अपनी लेयर पर डाटा पैकेट्स पर कुछ ऑपरेशन करने के बाद जैसे कि Framing करने के बाद उसे network लेयर की तरफ भेज देना | फिजिकल लेयर से जो भी डाटा डाटा लिंक लेयर में आता है वो raw डाटा bitstream के फॉर्मेट में होता है और इस डाटा के error फ्री होने कि probability बहुत काम होती है |

जब डाटा बिट्स सेन्डर से रिसीवर की ओर ट्रांसमिट होती है तो बिट्स की संख्या में या डाटा में कुछ कम, ज्यादा या बराबर bits हो सकती है और उनकी value भी डिफरेंट हो सकती है | तो ऐसी स्थिति में डाटा लिंक लेयर का यह काम होता है कि डाटा में गड़बड़ को डिटेक्ट करे और अगर कोई error निकले तो उसे करेक्ट करने की कोशिश करे|

दरअसल होता यह है कि जो डाटा लिंक लेयर होती है वो डाटा को छोटे छोटे frames में डिवाइड करती है जिसे हम Framing के नाम से जानते है| और फिर हर एक फ्रेम के लिए checksum compute करती है और फिर जब यह डाटा receiving एन्ड पर पहुँचता है तो फिर वहां पर यह checksum recompute होता है |

अगर रिसीविंग end पर जो नया चेकसम generate किया जाता है वो अगर फ्रेम के अंदर वाले चेकसम से डिफरेंट है तो फिर यहाँ पर डाटा लिंक लेयर समझ जाती है कि कोई error है और फिर इस error को दूर करने के लिए वो कुछ स्टेप्स लेती है |

पर यह Framing का process जितना आपको पढ़ने में आसान लग रहा है इतना यह डाटा लिंक लेयर के लिए होता नहीं है | इसके लिए डाटा लिंक लेयर एक approach तो यह करती है कि वो हर एक फ्रेम के बीच में टाइम गैप्स को इन्सर्ट कर देती है | जैसे कि हम एक ordinary text में words के बीच में space insert कर देते है | पर यहाँ पर नेटवर्क आपके इस टाइम गैप्स को सही तरह से कैलकुलेट करने की गारंटी rare ही लेता है |

और ट्रांसमिशन के दौरान इस बात का बड़ा डर रहता है कि कही कुछ टाइम गैप्स बीच में से गायब न हो जाये या फिर कुछ टाइम गैप्स बहार से insert या add न हो जाये|

Checksum क्या होता है ?

Checksum कोई भी एक वैल्यू हो सकती है जो डाटा अथवा फाइल की integrity check करती है कि जो डाटा sender end से सेंड हुआ है तो वही same डाटा रिसीवर end पर रिसीव हुआ है या नहीं | Checksum एक तरह का sum है जो डाटा की validity verify करता है कि data valid है या नहीं | example के लिए Checksum कोई भी एक नंबर या bytes हो सकता है एक फाइल के अंदर|

What are the types of Framing ?| Framing के कितने प्रकार होते है?

Framing के निम्नलिखित प्रकार होते है |

Character Count
Flag Bytes with byte stuffing
Starting and ending flags, with bit stuffing.
Physical layer coding violation.

Framing की एक approach जो हमने ऊपर देखी टाइम गैप्स वाली वो एप्रोच बहुत ही रिस्की है क्योकि उसमे टाइमिंग को मार्क करना पड़ता है हर फ्रेम के स्टार्ट और एन्ड में, इसलिए इस समस्या से निजात पाने के लिए हम कुछ और Framing techniques डिसकस कर रहे है जो कि नीचे निम्नलिखित है |

Character Count

पहली Framing तकनीक Character Count में header के अंदर हम एक फील्ड रखते है जिसमे हम फ्रेम में जितने भी characters है उसके count को रखते है | और destination एन्ड पर यही करैक्टर count देख कर डाटा लिंक लेयर को यह पता चल जाता है कि कितने characters है और इस फ्रेम का end कहा पर होगा | नीचे दिए हुए चित्र को देख कर आप यह Framing की technique को आसानी से समझ सकते है |

character-stream
Methods For Framing In Data Link Layer In HindiFraming: Character Stream

पर इस Framing तकनीक के साथ सबसे बड़ी खराबी यह है कि यहाँ पर जो करैक्टर काउंट है उसमे अगर transmission error के कारण अगर कोई चेंज होता है तो फिर destination end पर पूरा synchronization गड़बड़ हो जाता है और उसे अगले फ्रेम का start समझने में दिक्कत आती है और वह गलत डाटा interprete कर सकती है |

जैसे कि ऊपर दिए हुए चित्र में अगर दूसरे फ्रेम का करैक्टर काउंट 5 कि जगह 7 हो जाये तो फिर destination end पर पूरा synchronization बिगड़ जायेगा और उसे next फ्रेम का start बिट ढूढ़ने में असफलता हाथ लगेगी | इसलिए इस character count Framing तकनीक का उपयोग बहुत ही rare किया जाता है |

Flag Bytes with byte stuffing

और दूसरी Framing technique Flag Bytes with byte stuffing जो है वो resynchronization की प्रॉब्लम को solve करने के लिए एक नयी process डेवेलोप करती है | और इस तकनीक के हिसाब से जब भी किसी फ्रेम में error आ जाये तब अगले फ्रेम को ASCII character code sequence के साथ भेजते है जैसे कि starting में DLE STX और frame के एन्ड में DLE ETX |

तो ऐसी में अगर कभी भी डेस्टिनेशन पॉइंट पर कोई फ्रेम का सिंक्रोनाइजेशन बिगड़ता है तो फिर वह यह ASCII code को देख कर अपना synchronization दुरुस्त कर सकता है |

पर इस तकनीक के साथ एक सीरियस issue यह है कि अगर floating पॉइंट नंबर के ऑब्जेक्ट प्रोग्राम को अगर बाइनरी डाटा के रूप में transmit करेंगे तो फिर इस बात कि possibility बहुत है कि जो ASCII code character है वो डाटा के फॉर्म में आ जाये| और फिर यह फ्रेम के साथ interfere हो सकते है |

पर इस प्रॉब्लम को सोल्वे करने करने का एक तरीका यह है कि डाटा में जहाँ जहाँ पर ‘ACCIDENTAL’ आये उसके पहले एक उसकी DLE करैक्टर add कर दिया जाये | और फिर receiving एन्ड पर डाटा लिंक लेयर DLE करैक्टर को रिमूव करके उसे नेटवर्क लेयर को ट्रांसफर कर देगी |

इस तकनीक को हम character stuffing के नाम से भी जानते है | चलिए अब इसे हम नीचे दिए हुए एक example से समझते है |

नीचे दिए हुए चित्र में आप stuffing से पहले और stuffing से बाद के डाटा को देख सकते है | यहाँ पर हमारे डाटा में DLE है तो इसलिए हम इसके आगे भी DLE करैक्टर stuff कर देते है जो कि रिसीविंग end पर डाटा लिंक लेयर द्वारा हटा लिया जाता है और हमारा डाटा भी interfere होने से बच जाता है |

framing-content
Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi: Character Stuffing

पर इस Framing method की एक disadvantage यह है कि यह 8bit character स्कीम को use कर सकता है और यह इसी में लिमिटेड है और यह ASCII करैक्टर कोड के लिए भी पर्टिकुलर है |

और जैसे जैसे नेटवर्क और ट्रांसमिशन बढ़ रहे है वैसे में यह 8bit character stuffing तकनीक बहुत सारी दिक्कत पैदा कर देती है | क्योकि इससे हमें एक लम्बे अथवा लार्ज डाटा में बहुत सारे ASCII character code insert करने पड़ते है |

इसलिए इस समस्या को दूर करने लिए एक ऐसी तकनीक लायी गयी जिसमे हम एक arbitrary size कि character length ले सकते है |

Starting and ending flags, with bit stuffing.

तो इस नयी तकनीक Starting and ending flags, with bit stuffing. के अंतर्गत हम एक फ्रेम में कई सारे बिट्स और करैक्टर कोड्स को रख सकते है | इस तकनीक के अंतर्गत प्रत्येक फ्रेम के स्टार्ट और एन्ड में एक स्पेशल टाइप का बिट पैटर्न होता है जिसे हम फ्लैग बाइट भी कहते है जैसे कि 0111110 |

मतलब जब भी सेन्डर डाटा लिंक लेयर पांच लगातार 1 देखेगी तो वह फिर एक 0 इन्सर्ट या stuff कर देगी | मतलब कि बिट स्तुफ्फिंग में हर एक डाटा फ्रेम के बीच एक flag pattern होगा |

इसलिए जब कभी रिसीवर कोई फ्रेम डाटा को रिसीव करने में track loose कर गया या फिर synchronization बिगड़ गया तो फिर वह इनपुट में से फ्लैग पैटर्न को देख लेगा और फिर से डाटा अथवा नेक्स्ट फ्रेम को रिसीव कर लेगा क्योकि यह फ्लैग पैटर्न को डाटा में कभी भी use नहीं किया जायेगा यह सिर्फ फ्रेम के starting और end में रहेंगे |

Physical layer coding violation.

और अब हम बात करते है आखिरी Framing technique Physical layer coding violation की, यह Framing तकनीक का उपयोग हम ऐसे नेटवर्क में करते है जहाँ पर फिजिकल मध्यम में डाटा redundancy होती है |

यहाँ पर हम 1 बिट का use दो physical बिट्स को रिप्रेजेंट करने के लिए करते है | high -low के pair को हम 1 से represent करते है और low -high के pair को हम 0 से रिप्रेजेंट करते है |

इसलिए यहाँ पर हम high -low और low -high के pair को डाटा में कभी भी use नहीं करते है | और हर डाटा का ट्रांजीशन हम इन दो pair के बीच में करते है | और यह invalid physical कोड 802 LAN का पार्ट है |

अगर आप data link layer से सम्बंधित कुछ और अच्छे ब्लॉग पोस्ट पढ़ना चाहे तो नीचे दिए हुए ब्लॉग लिंक की सहायता से पढ़ सकते है |

Role Of Data Link Layer On the Internet 2020.

What Is Data Link Protocol?/ data link layer protocols list?

Error Control Using Data Link Layer In Computer Network

Flow Control Using Data Link Layer In Computer Network

Conclusion:

तो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट(Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi) में हमने आपको डाटा लिंक के अंतर्गत होने वाले Framing technique और फ्रेमन methods के बारे में विस्तार से हिंदी में बताया | डाटा लिंक लेयर का काम भी इन Framing तकनीक के जरिये transmission के दौरान error free data को transmit करना है | और डाटा में कोई error है तो उसे detect करके उसे correct करने का है |

और इस ब्लॉग पोस्ट(Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi) में हमने Framing methods से रिलेटेड कुछ इम्पोर्टेन्ट questions को डिसकस किया है जैसे कि What is framing in the data link layer? What are framing and its methods? What are the types of framing? What are the protocols of the data link layer? framing that is done on the data link layer is of how many types.

इस ब्लॉग(Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi) को लेकर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो आप हमें इस पते [email protected]पर ईमेल लिख सकते है|

आशा करता हूँ, कि आपने इस पोस्ट Methods For Framing In Data Link Layer In Hindi को खूब एन्जॉय किया होगा|

आप स्वतंत्रता पूर्वक अपना बहुमूल्य फीडबैक और कमेंट यहाँ पर दे सकते है|

आपका समय शुभ हो|

Anurag

I am a blogger by passion, a software engineer by profession, a singer by consideration and rest of things that I do is for my destination.